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छत्तीसगढ़
Bilapur बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में अग्नि सुरक्षा व्यवस्था की कमजोर हालत पर हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। सू-मोटो जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने 17 जिलों के कलेक्टरों को अंतिम अवसर देते हुए पूछा है कि आखिर फायर स्टेशन के लिए जमीन उपलब्ध कराने संबंधी पत्र का जवाब अब तक क्यों नहीं दिया गया। सोमवार को सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की बेंच ने पाया कि 25 मार्च 2026 को निदेशक अग्नि सुरक्षा ने 17 कलेक्टरों को पत्र भेजा। 27 अप्रैल को रिमाइंडर भी जारी किया गया।बावजूद इसके किसी भी कलेक्टर ने जवाब नहीं दिया। अदालत ने इसे गंभीर लापरवाही मानते हुए कहा कि अब और देरी बर्दाश्त नहीं होगी।
मालूम हो कि प्रदेश में आग से निपटने के संसाधनों की स्थिति पहले से ही कमजोर है। 200+ ब्लॉक मुख्यालयों में से 145 से अधिक जगहों पर एक भी फायर वाहन नहीं है। राजधानी रायपुर में लगभग 22 फायर वाहन, जबकि बिलासपुर में केवल 10 वाहन हैं। कई जिलों में अब तक फायर स्टेशन ही नहीं बने। 2018 से पहले अग्नि सुरक्षा की जिम्मेदारी स्थानीय निकायों पर थी। बाद में राज्य ने नया अधिनियम बनाकर निदेशक अग्नि सुरक्षा कार्यालय बनाया। नियम के अनुसार हर जिले में जिला अग्नि सुरक्षा अधिकारी होना चाहिए, लेकिन अधिकांश जिलों में अभी तक नियुक्ति नहीं हुई है।
सुनवाई में राज्य की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता शशांक ठाकुर ने बताया कि कलेक्टरों को टॉप प्रायोरिटी पर जमीन उपलब्ध कराने कहा गया था, फिर भी जवाब नहीं आया। न्याय मित्र अधिवक्ता सुदीप श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि सरकार खुद मान चुकी है कि किसी कलेक्टर ने जवाब नहीं दिया। इसके बाद कोर्ट ने 17 कलेक्टरों को अंतिम मौका दिया और आदेश की प्रति मुख्य सचिव को भी भेजने के निर्देश दिया है। अगली सुनवाई 23 जून को होगी।
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